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बच्चे पहले भी बीमार होते थे(Children Got Sick in the Past Too)

“हमारे ज़माने में तो बच्चे कभी बीमार नहीं होते थे।”
“हम तो कभी डॉक्टर के पास नहीं गए। सब कुछ घर पर ही ठीक हो जाता था।”

बहुत से बुज़ुर्ग मानते हैं कि “हमारे जमाने में बच्चे कम ही बीमार होते थे,” या “तब मुश्किल से ही डॉक्टर के पास जाना पड़ता था।” यह अनुभवी लोगों का दृष्टिकोण समझने लायक है, लेकिन तथ्य कुछ और कहते हैं। इतिहास और आधुनिक शोध बताते हैं कि पहले भी नवजात शिशु और बच्चे कई बीमारियों से ग्रस्त थे; बस उन्हें पहचानना और सही समय पर इलाज करवाना मुश्किल था।

इतिहासिक आँकड़े

  • 16वीं-17वीं सदी: हर चार में से एक या तीन में से एक बच्चा 15 साल की उम्र से पहले ही मर जाता था​cam.ac.uk
  • 1880, न्यूयॉर्क (USA): इस समय 1000 में से 288 नवजातों की एक साल में ही मृत्यु हो जाती थी​nature.com
  • उस युग में बच्चों में “दस्त, डिफ्थीरिया, स्कार्लेट फीवर, तपेदिक” जैसी संक्रामक बीमारियाँ आम थीं​nature.com
  • भारतीय उपमहाद्वीप में भी यही स्थिति थी: पटना (बिहार) जिले में 1915 में नवजात मृत्यु दर 204 प्रति 1000 थी, जो 1918 में बढ़कर 258 हो गई​archive.org

इतिहास के ये आँकड़े साफ़ बताते हैं कि पहले के भी जमाने में नवजात और बच्चे बड़ी संख्या में मरते थे। उस समय के डॉक्टरी रिकॉर्ड और माता-पिता के ज़िक्र बताते हैं कि बचपन में बीमारी आम थी, बस आज की तरह उसका नामकरण या इलाज उपलब्ध नहीं था​cam.ac.uknature.com। उदाहरण के लिए, अंग्रेजी शोध में पाया गया कि 1600-1700 की शताब्दी में जन्मे हर 1000 नवजातों में से लगभग 123–154 पहले साल ही जीवित नहीं रहते थे​cam.ac.uk

बच्चों में आम बीमारियाँ

बीमारियों के स्वरूप को भी पुरानी दैनंदिन अभ्यस्थताओं के हिसाब से समझा जाता था। पुराने रिकॉर्ड में देखने पर पता चलता है कि उस समय बुखार (मलेरिया, निमोनिया, इन्फ्लूएंज़ा सहित), दस्त/हैजा, काला ज्वर और प्लेग जैसी बीमारियाँ आम थीं​archive.org। टीके, साफ पानी और आधुनिक चिकित्सकीय सुविधाओं की कमी की वजह से ये संक्रामक रोग जल्दी फैलते थे और जानलेवा साबित होते थे।

नवजात संक्रमण और आधुनिक स्थिति

हालांकि आज स्थिति बेहतर है, फिर भी नवजात संक्रमण एक गंभीर समस्या है। कई अध्ययन बताते हैं:

  • दुनिया में हर साल लगभग 2.6 मिलियन नवजात संक्रमणों (NSNIs) की वजह से शिशु मृत्यु होती है​।
  • अकेले नवजात सेप्सिस के करीब 3 मिलियन मामले होते हैं और इससे लगभग 570,000 नवजात की मौत होती है​pmc.ncbi.nlm.nih.gov
  • विशेष रूप से कम-आय वाले देशों में नवजात सेप्सिस बच्चों की मृत्यु का प्रमुख कारण है​।
  • उन देशों में परिवारों और स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमण की शुरुआती पहचान का ज्ञान नहीं होता और लैब परीक्षण के साधन भी सीमित रहते हैं।
  • आर्थिक तंगी या दूरदराज़ के इलाक़ों में अस्पतालों की कमी की वजह से भी कई लोग समय पर इलाज नहीं करवा पाते​pmc.ncbi.nlm.nih.gov

जागरूकता और बदलाव

पहले भी बच्चे बुखार और संक्रामक रोगों से ग्रस्त होते थे, लेकिन तब इलाज के साधन कम थे इसलिए उनकी बीमारी का पता नहीं चलता था। पर आज के समय में टीकाकरण और बेहतर चिकित्सा की वजह से बचपन की कई जानलेवा बीमारियाँ नियंत्रण में आ गई हैं। उदाहरण के लिए, 1980 के दशक में नवजात टिटेनस से सालाना लगभग 800,000 बच्चे मरते थे​who.int, लेकिन अब टीके और साफ-सफ़ाई के चलते यह संख्या बहुत घट गई है – 2013 तक यह घटकर 49,000 रह गई, जो 1980 के स्तर से 94% कम है​who.int

बुज़ुर्गों के अनुभव का आदर रखते हुए भी हमें याद रखना चाहिए कि इतिहास और आंकड़े बताते हैं कि पहले भी बच्चे बीमार होते थे​cam.ac.uknature.com। हमारी नई जानकारी, जागरूकता और चिकित्सा सुविधाएँ इन बीमारियों को रोकने में कारगर हैं। इसलिए जब भी बच्चे में बीमारी के लक्षण दिखें, तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है, और हमें अपने बच्चों को सेहतमंद रखने के लिए सतर्क रहना चाहिए।

देखभाल और उपचार में परिवर्तन

पुरानी चिकित्सा में नवजात संक्रमण का कोई सीधा इलाज नहीं था। पारंपरिक दवाओं और जड़ी-बूटियों से सिमित उपचार किए जाते थे। 19वीं सदी के अंत तक एंटीबायोटिक नहीं थे; इसी वजह से बैक्टीरिया संबंधी संक्रमणों को बढ़ने से नहीं रोका जा सकता था। हालांकि 1930-40 के दशक में सल्फा-ड्रग्स (1937) और पेनिसिलिन (1940 के दशक) के आने पर नवजात एवं शिशु मृत्यु दर में जबरदस्त गिरावट आई​cdc.gov। उदाहरण के लिए, 1930–49 के बीच एंटीबायोटिक की उपलब्धता से शिशु मृत्यु दर 52% तक घट गई, जिसमें नवजात संक्रमण की वजह से होने वाली मौतें भी 40% कम हुईं​cdc.gov

  • प्रतिजैविक एवं टीके: एंटीबायोटिक के अलावा टीकाकरण भी शुरू हुआ। टीटनस टीके ने माताओं और नवजातों को सुरक्षित किया; इसके चलते नवजात टेटनस के मामलों में 1988 से अब तक 97% की गिरावट आई है​who.int
  • पोषण और देखभाल: आधुनिक काल में नवजातों को सही पोषण (कोलोस्ट्रम, शिशु आहार) और गर्मी की देखभाल (कंगारू केयर) दी जाती है। दसगुणा पागलपन जैसी संस्कारों की बजाय अस्पतालों में जन्म के तुरंत बाद बच्चे को सुरक्षित नर्सिंग (ब्रेस्टफ़ीडिंग) और नवजात देखभाल कक्ष (NICU) में रखा जाता है, जहाँ उसे संक्रमण से बचाने के लिए विशेष सावधानियाँ होती हैं।

आधुनिक युग में स्थिति और सुधार

वर्तमान में संक्रामक रोगों पर नियंत्रण, टीकाकरण और बेहतर स्वच्छता के कारण नवजात मृत्यु दर पहले से बहुत कम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 1990 में 5.0 मिलियन नवजात शिशु मर रहे थे, जो 2022 तक घटकर 2.3 मिलियन हो गए​who.int। इसके बावजूद नवजात काल (पहले 28 दिन) को अब भी सबसे संवेदनशील माना जाता है: 2022 में 47% सभी 5 वर्ष से कम उम्र की बाल मृत्यु नवजात दौर में हुई​who.int

आधुनिक चिकित्सा में नवजात की पहली बार निगरानी अस्पताल में ही जन्म के तुरंत बाद की जाती है। नवजात का वजन, लम्बाई आदि मापा जाता है और उसे संक्रमणसे बचाने के उपाय (उदाहरणतः साफ़ सुथरे बिस्तर, इन्क्यूबेटर और टीके) अपनाए जाते हैं।आधुनिक युग में स्वच्छ पेयजल, प्रसूतिगृह की साफ-सफाई, पाश्चराइज्ड दूध, माता का संक्रमण मुक्त रहना इत्यादि से नवजात संक्रमणों में भारी कमी आई है​ourworldindata.orgcdc.gov। उदाहरण के लिए, क्लोरीनयुक्त पानी से हाथ धोने या अस्पताल में रोकथाम के कारण मातृज्वर (प्यूरपिरल फीवर) प्राय: समाप्त हो चुका है। फिर भी कई विकासशील क्षेत्रों में नवजात की मौतों का मुख्य कारण संक्रमण है​।

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