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Navratri Puja Vidhi In Hindi: नवरात्रि की पूजा कैसे की जाती है? यहां जानिए माता रानी की पूजा की सरल विधि स्टेप बाय स्टेप

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यह एक आसान, घर पर करने योग्य नवरात्रि पूजा विधि है — सरल भाषा में, स्टेप-बाय-स्टेप। अगर आप पहली बार कर रहे हैं तो भी यह विधि निभा सकते हैं।
सामग्री (What you need)
- कलश (छोटा बर्तन) — साफ़ होकर।
- पवित्र पानी (गंगाजल या नल का पानी)
- कुछ मिट्टी (कुम्हार की) या सात प्रकार के अनाज (सात सावन) — गट्टा/घट स्थापना के लिए
- नारियल (एक)
- सुवर्ण/लाल/पीला/हरा कपड़ा (कलश पर बाँधने के लिए)
- चावल, हल्दी, हल्दी का तिलक, रोली/कुमकुम
- दूर्वा, फूल, पेड़-पत्ते (अगर उपलब्ध हों तो बेलपत्र इत्यादि)
- दीपक (मक्खन या तेल का दीया), अगरबत्ती, धूप
- फल और प्रसाद (चावल, गुड़, फलों का थाल)
- दीपक माचिस/लाइटर, छोटा थाल (नैवेद्य के लिए)
- गीत/स्तोत्र की शीट (यदि आप पढ़ना चाहें)
पूजा पूर्व तैयारी
- घर/पुजा स्थान को साफ़ कर लें।
- कलश रखें: मिट्टी/अनाज से कलश के अंदर एक छोटा आधार बनायें (घट स्थापना) और कलश में पानी भरें।
- कलश पर नारियल रखें और उसे लाल/पीले कपड़े से ढक कर रखें।
- पूजास्थल पर चित्र/मूर्ति रखें (यदि हैं), नहीं तो कलश ही देवी का प्रतीक मानें।
पूजा विधि — (Step-by-Step)
1. संकल्प (Sankalp)
पंजाबी/हिंदी में सरल संकल्प लें — उदाहरण:
“ॐ अस्मिन् स्थानि श्रीं भवति/मम/परिवारस्य रक्षा हेतु नवरात्रि व्रत/पूजा करोतु।”
(सच्चा मन रखकर संकल्प बोलें — छोटा और मन से।)
2. घत/कलश स्थापना (Ghatasthapana / Kalash Sthapana)
- मिट्टी/अनाज से कलश का आधार तैयार करें और कलश रखें।
- कलश में पानी भरें, दाने-चावल छिड़कें, हल्दी-चावल लगायें।
- कलश के ऊपर नारियल रखें और लाल कपड़ा बांध दें।
- कलश को पूजास्थल के दक्षिण-पश्चिम कोना या लक्षित स्थान पर रखें।

3. आरती-दीप प्रज्वलन (Lighting the lamp)
- दीपक जलायें और आरती का प्रारम्भ करें। दीपक को देवी की ओर करें।
- “ॐ” का उच्चारण कर दें, फिर देवी का आवाहन करें: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” (यदि बोलना सहज लगे)।
(ऊपर मंत्र छोटा-सा है; आप केवल “ॐ दुर्गायै नमः” भी बोल सकते हैं।)
4. माला/स्तोत्र/आराधना (Stotra / Bhajan)
- अगर आप देवी के जप या छोटा स्तोत्र जानते हैं तो 1–3 बार पढ़ें। उदाहरण: “ॐ दुर्गे नमः” / “ॐ दुर्गायै नमः” 11/21 बार।
- गायन/भजन भी कर सकते हैं — घर में भजन संस्कार बढ़ाता है।
5. नैवेद्य चढ़ाना (Offering Naivedya)
- फल, प्रसाद, गुड़, दूध या की थाली देवी को अर्पित करें।
- चावल/पान/नैवेद्य पर रोली/कुमकुम लगायें।
6. आचमन, प्रसाद वितरण (Aachaman & Prasad)
- आचमन या तर्पण छोटी मात्रा में करें (यदि परम्परा में आता हो)।
- पूजा के बाद प्रसाद परिवार में बाँट दें और देवी से आशीर्वाद माँगे।
7. दीप/आरती (Aarti)
- शाम को आरती करें — घर के सभी सदस्य दीप दिखा कर देवी को प्रणाम करें।
- आरती गाएं या आरती के शब्द तीन-चार बार बोल लें।
8. विसर्जन/समापन (Visarjan / Samapan)
- नवरात्रि के अंत में (अठमी/नवमी/दशमी के अनुसार) कलश का विसर्जन या मिट्टी में समर्पण करें।
- अगर प्रतिदिन पूजा कर रहे हैं तो कलश को वही रखें और प्रतिदिन फूल/नैवेद्य बदल दें।
हर दिन के लिए छोटी टिप्स (Daywise Simple Ideas)
- प्रत्येक दिन देवी के एक रूप (जैसे शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी आदि) को समर्पित करें — उनके गुणों के बारे में 2-3 वाक्य लिखकर पढ़ें।
- हर दिन अलग रंग पहनना चाहते हैं तो दिन-विशिष्ट रंगों का पालन करें (बहुत लोकप्रिय है)।
- व्रत कर रहे हैं तो सरल फल/दूध/फलाहार लें — डॉक्टर की सलाह अनुसार रखें।
अगर समय कम है — पूरी विधि की जगह संक्षिप्त पूजा करें: दीप जलायें, संकल्प लें, “ॐ दुर्गायै नमः” 11 बार जप करें, फल अर्पित करें और आरती करें।
- मन की शुद्धि सबसे महत्वपूर्ण है — शब्दों से ज्यादा भावना मायने रखती है।
- बच्चों को भी छोटी-छोटी चीजें (फूल देना, दीप दिखाना) करवा कर शामिल करें — इससे परम्परा बनी रहती है।
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