पाकिस्तान ने शिमला समझौता निलंबित किया – क्या होगा असर?

हाल ही में पाकिस्तान ने एक ऐसा फैसला लिया है जिसने भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक और बड़ी दरार डाल दी है। पाकिस्तान सरकार ने 1972 में भारत के साथ किए गए शिमला समझौते को “निलंबित” करने की घोषणा की है। यह वही समझौता है जिसे भारत-पाक युद्ध के बाद शांति स्थापित करने के उद्देश्य से किया गया था।
शिमला समझौता क्या था?
शिमला समझौता जुलाई 1972 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो के बीच हुआ था। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य था कि भारत और पाकिस्तान अपने सभी विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाएंगे, और आपसी बातचीत के जरिए हल निकालेंगे। खास तौर पर, इसमें यह तय किया गया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर सहित सभी मुद्दे द्विपक्षीय बातचीत से सुलझाए जाएंगे।
पाकिस्तान ने अब यह समझौता क्यों निलंबित किया?
इस कदम के पीछे पाकिस्तान का तर्क है कि भारत ने कथित रूप से जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म कर, शिमला समझौते की भावना का उल्लंघन किया है। साथ ही, भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ की जा रही सख्त कार्रवाई भी पाकिस्तान को असहज कर रही है।
यह कदम NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद आया है, जिसमें कई निर्दोष लोगों की जान गई।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने पाकिस्तान के इस कदम को पूरी तरह से खारिज किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि शिमला समझौता एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त समझौता है, जिसे इस तरह से एकतरफा निलंबित करना गंभीर विषय है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही अपने भाषण में कह चुके हैं कि “भारत हर आतंकी को ट्रैक करेगा और सज़ा देगा।” उनका कड़ा रुख इस बात की ओर इशारा करता है कि अब भारत केवल ‘बातचीत’ के भरोसे नहीं बैठेगा, बल्कि कड़ी कार्रवाई को भी प्राथमिकता देगा।
इसका असर क्या होगा?
- LOC पर तनाव बढ़ेगा:
शिमला समझौते के तहत LOC (Line of Control) को एक प्रकार की ‘विवादित सीमा रेखा’ माना गया था। अब जब यह समझौता निलंबित हो गया है, तो LOC पर संघर्ष की आशंका और अधिक बढ़ सकती है। - राजनयिक संबंधों में गिरावट:
पहले से ही भारत-पाक रिश्तों में ठंडक है। अब जब पाकिस्तान ने समझौता तोड़ा है, तो किसी भी प्रकार की वार्ता की संभावना और कम हो जाएगी। - अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की छवि खराब होगी:
एकतरफा समझौता रद्द करना अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाएगा।
भारत की अगली रणनीति क्या हो सकती है?
भारत की रणनीति अब स्पष्ट है – “आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस”। प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के अनुसार, अब पाकिस्तान पर कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने का प्रयास होगा। भारत संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को बेनकाब कर सकता है।
क्या शांति की उम्मीद है?
यह कहना मुश्किल है। जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन पर आतंकियों को पनाह देता रहेगा और बातचीत को सिर्फ दिखावा बनाए रखेगा, तब तक शांति की कोई उम्मीद नहीं की जा सकती।
निष्कर्ष
पाकिस्तान द्वारा शिमला समझौते को निलंबित करना न केवल एक समझौते का अंत है, बल्कि यह उपमहाद्वीप में शांति की उम्मीदों को भी झटका देता है। भारत को अब और अधिक सतर्क रहकर, अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए आगे बढ़ना होगा।
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