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अक्षय तृतीया 2025: जानिए इसका महत्व, शुभ मुहूर्त और क्या खरीदना है शुभ
अक्षय तृतीया का महत्व
अक्षय तृतीया, जिसे ‘अक्ती’ या ‘अखती’ भी कहा जाता है, हिंदू धर्म और जैन धर्म में एक अत्यंत शुभ पर्व माना जाता है। “अक्षय” का अर्थ है जो कभी समाप्त न हो। इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य, जैसे दान, पूजा, जप, तप या खरीदारी, अक्षय फल प्रदान करता है—यानी उसका पुण्य और प्रभाव कभी समाप्त नहीं होता।
धार्मिक मान्यताएँ:
- माना जाता है कि इसी दिन त्रेता युग का आरंभ हुआ था।
- इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।
- जैन धर्म में, यह दिन भगवान ऋषभदेव के पहले उपवास समाप्त होने का प्रतीक है।
- महाभारत में भी यह उल्लेख है कि युधिष्ठिर को इसी दिन अक्षय पात्र प्राप्त हुआ था, जो कभी खाली नहीं होता था।
इस दिन किए गए कार्यों का दीर्घकालीन प्रभाव रहता है, इसलिए इसे विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, वाहन खरीद, सोना-चांदी खरीदने के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
अक्षय तृतीया 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
- तारीख: सोमवार, 29 अप्रैल 2025
- शुभ मुहूर्त (खरीदारी, पूजा, निवेश के लिए):
- सुबह 7:49 बजे से रात 8:07 बजे तक
- यह मुहूर्त लगभग 12 घंटे 18 मिनट तक रहेगा
इस दिन क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
- सोना और चांदी – समृद्धि और स्थायित्व का प्रतीक
- नए वस्त्र और आभूषण – सुख-शांति के संकेत
- नई संपत्ति या वाहन – दीर्घकालिक लाभ
- धार्मिक सामग्री – पूजा और कर्मों के लिए
- इलेक्ट्रॉनिक सामान – सुख-सुविधा में वृद्धि
अक्षय तृतीया की परंपराएं और उपाय
- दान करना: अन्न, जल, वस्त्र, चप्पल, छाता और तांबे के बर्तन दान करना पुण्यदायी होता है।
- तुलसी जल से स्नान और पूजा: भगवान विष्णु की विशेष पूजा करें।
- घी का दीपक जलाना: यह घर में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
- पितरों के लिए तर्पण और भोजन भी इस दिन किया जा सकता है।
- अक्षय तृतीया केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि शुभता, समृद्धि और नए आरंभ का प्रतीक है। चाहे आप कुछ नया शुरू करना चाहें या कोई निवेश करना हो, यह दिन अत्यंत उपयुक्त है। अगर आप इस दिन कुछ खरीदते हैं या शुभ काम करते हैं, तो वह लंबे समय तक फलदायी साबित होता है।